प्रधान मंत्री उजाला योजना

प्रधान मंत्री उजाला योजना

क्या है उजाला योजना ?:

उजाला योजना, भारत सरकार की एक योजना है जिसके अन्तर्गत कम मूल्य पर एलईडी बल्ब दिये जाते हैं, ताकि बिजली की बचत की जा सके।

यह योजना देश के लिए प्रभावशाली है जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना के तहत देश में अब तक करोड़ो की संख्या में एलईडी बल्ब बांटे जा चुके हैं।

इस योजना की खास बात खास बात यह है कि अगर एलईडी बल्ब खराब हो गया हो,लेकिन वह टूटा न हो तो तीन साल के अंदर ईईएसएल इसे मुफ्त में बदल देती है।

“प्रकाश है तो अंधकार अपने आप दूर हो जायेगा”:

इसी उद्देश्य के साथ देश में साल 2015 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्रे मोदी द्वारा उजाला योजना की शुरुआत की गई थी।

यह योजना देश के लिए प्रभावशाली है जानकारी के लिए बता दें कि इस योजना के तहत देश में अब तक करोड़ो की संख्या में एलईडी बल्ब बांटे जा चुके हैं।

इस योजना से प्रतिवर्ष 550 करोड़ रुपए की बचत हो रही है।

550 करोड़ रुपए की बचत:

पर्यावरण के लिए यह योजना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके प्रयोग से देश में प्रतिवर्ष 50 मिलियन टन कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है।

इस योजना की मदद से प्रतिवर्ष 47,000 किलोवाट बिजली बचाई गई, जिसके कारण आज देश के ज्यादातर राज्यों में (खासतौर से ग्रामीण इलाकों में) 24/7 बिजली मिल रही है।

उजाला योजना के लिए सरकार द्वारा किये गए कार्य :

  • सरकार ने उजाला योजना के तहत 46,80,000 बल्ब वितरित किए गए हैं।
  • यह काम बिजली मंत्रालय द्वारा 7 साल में किया गया है।
  • एलईडी बल्ब की कीमत 300-350 रुपए प्रति बल्ब से कम होकर 70-80 रुपए प्रति बल्ब आ गई है।
  • *इस योजना के कारण 9,565 मेगावॉट की अधिकतम मांग से मुक्ति मिली |
  • उजाला योजना के अंतर्गत किसी भी ख़राब बल्ब का वितरण नहीं किया गया है |
  • राज्य सरकारों को यकीन दिलाना थी बड़ी चुनौती
  • वर्ष 2019 में ईईएसएल के मैनेजिंग डायरेक्टर सौरव कुमार ने एक इंटरव्यू में कहा था, ‘शुरुआत में चुनौती एलईडी बल्ब बेचने की नहीं थी, बल्कि राज्य सरकारों और लोगों को विश्वास दिलाने की थी कि यह उनके लिए फायदे का सौदा है।
  • दरअसल, जब एलईडी को मार्केट में उतारा गया था तो लोग कीमत सुनकर ही मन बदल लेते थे और इसकी खासियतों के बारे में जानना भी नहीं चाहते थे।

‘बचत लैम्प योजना’: 01 मई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुरू की थी। इस योजना के अन्तर्गत एक वर्ष के अन्दर ही 9 करोड़ एलईडी बल्बों की बिक्री हुई, जिससे लगभग 550 करोड रुपये के बिजली बिल की बचत हुई।

आसान नहीं थी राह: जब उजाला योजना पर काम शुरू हुआ था तो इससे जुड़े लोग सफलता को लेकर पूरी तरह से आश्वस्त नहीं थे। भारत में एलईडी रेवलूशन की राह इतनी आसान भी नहीं थी, क्योंकि इस योजना की जब शुरुआत हुई थी तो एलईडी बल्ब की कीमत सामान्य बल्ब से तकरीबन 30-35 गुना ज्यादा थी। साल 2014 से पहले देश में एलईडी बल्ब खरीदने के लिए 300 रुपये से भी ज्यादा खर्च करने पड़ते थे, जबकि सामान्य बल्ब की कीमत बमुश्किल 10 से 12 रुपये थी। ज्यादा दाम इसकी कामयाबी में बड़ी रुकावट थी। इसकी वजह थी कि उस वक्त एलईडी बल्बों का उत्पादन लाखों के बजाय हजारों में होता था। इससे लागत ज्यादा आती थी।