महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग

संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य 14 के तहत महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग के बारे में है। दरअसल स्वस्थ महासागर और समुद्र मानव अस्तित्व और पृथ्वी पर जीवन के लिए आवश्यक हैं। वे ग्रह के 70 प्रतिशत हिस्से को कवर करते हैं और भोजन, ऊर्जा और पानी प्रदान करते हैं। हमें पता होना चाहिए कि महासागर दुनिया के वार्षिक कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) उत्सर्जन का लगभग एक चौथाई हिस्सा अवशोषित करता है, जिससे जलवायु परिवर्तन कम होता है और इसके प्रभाव कम होते हैं। लिहाजा इनका संरक्षण एवं सतत् उपयोग आवश्यक है। फिर भी, मानव गतिविधि महासागरों और समुद्रों- ग्रह के सबसे बड़े पारिस्थितिकी तंत्र- को खतरे में डाल रही है और अरबों लोगों की आजीविका को प्रभावित कर रही है।

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# महासागरों, समुद्रों और समुद्री संसाधनों का संरक्षण और सतत उपयोग से सम्बंधित तथ्य और आंकड़े

 

महासागर आपातकाल की स्थिति में है क्योंकि बढ़ते यूट्रोफिकेशन, अम्लीकरण, महासागर के गर्म होने और प्लास्टिक प्रदूषण से इसका स्वास्थ्य खराब हो रहा है। इसके अतिरिक्त, अत्यधिक मछली पकड़ने की चिंताजनक प्रवृत्ति बनी हुई है, जिससे वैश्विक मछली भंडार का एक तिहाई से अधिक कम हो रहा है। हालाँकि समुद्री संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार करने, अवैध, असूचित और अनियमित मछली पकड़ने से निपटने, मछली पकड़ने की सब्सिडी पर प्रतिबंध लगाने और छोटे पैमाने के मछुआरों को समर्थन देने में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन लक्ष्य 14 को पूरा करने के लिए आवश्यक गति या पैमाने पर कार्रवाई आगे नहीं बढ़ रही है।

 

वहीं, इन प्रवृत्तियों का मुकाबला करने के लिए त्वरित और समन्वित वैश्विक कार्रवाई अनिवार्य है। इसमें समुद्र विज्ञान के लिए धन बढ़ाना, संरक्षण प्रयासों को तेज करना, प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र-आधारित समाधानों को आगे बढ़ाना, मानव-प्रेरित दबावों के अंतर्संबंधों और प्रभावों को संबोधित करना और ग्रह के सबसे बड़े पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए जलवायु परिवर्तन पर तत्काल प्रभाव डालना शामिल है।